आत्मनिर्भर पल्स मिशन 2025: दालों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की 6 वर्षीय योजना
दालें हमारे देश की प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं, खासकर शाकाहारी आबादी के लिए। लेकिन बढ़ता आयात हमारी अर्थव्यवस्था पर बोझ डाल रहा है। यह मिशन न केवल किसानों को सशक्त करेगा, बल्कि देश को खाद्य सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगा। इसके अलावा, जलवायु-अनुकूल बीज और सतत खेती को बढ़ावा देकर यह पर्यावरण की रक्षा भी करेगा।
मुख्य बिंदु Atmanirbhar Pulse Mission 2025 के
- 2025-26 के केंद्रीय बजट में शुरू की गई 6 वर्षीय योजना है ।
- लक्ष्य: तूर, उड़द, और मसूर दालों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी ।
- बजट: 1,000 करोड़ रुपये है |
- NAFED और NCCF द्वारा MSP-आधारित खरीद पर जोर है |
- आयात कम करने और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर देना ही इसका मुख्य उद्देश्य है |
- चना भारत में दालों का 47% उत्पादन करता है, लेकिन तूर, उड़द, और मसूर का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। यह मिशन इन दालों को प्राथमिकता देता है।
यह मिशन क्या है?(Atmanirbhar Pulse Mission 2025)
आत्मनिर्भर पल्स मिशन भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह 1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित की गई थी। इसका लक्ष्य अगले छह वर्षों में तूर (अरहर), उड़द, और मसूर के उत्पादन को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता को कम करना है।भारत दालों का एक प्रमुख उपभोक्ता और उत्पादक देश है, लेकिन बढ़ती मांग के चलते आयात पर निर्भरता बनी हुई है।
भारत में दालें हर घर की रसोई का हिस्सा हैं, लेकिन हमारी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। 2023-24 में भारत ने 47.38 लाख टन दालें आयात कीं गई थी जिसकी लागत 3.75 अरब डॉलर थी। यह मिशन आयात को कम करेगा और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाएगा।
मिशन की प्रमुख विशेषताएं
1- इसका मुख्य रूप से तीन दालो पर ज्यादा फोकस है तूर (15% उत्पादन), उड़द (10%), और मसूर (5%) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा |
2-NAFED और NCCF जैसी एजेंसियां अगले 4 वर्षों तक पंजीकृत किसानों से इन दालों की पूरी खरीद करेंगी ताकि किसानों को इधर उधर भटकना न पड़े |
3-चना, मसूर, तूर, मूंग, और उड़द सहित पांच दालों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि किया गया है |
4- ड्रोन, सेंसर, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खेती को स्मार्ट बनाना है |
5- नई तकनीकों और बीजों के उपयोग के लिए किसानों को प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध करवाना है |
6-यह मिशन 2025 से 2031 तक लागू रहेगा, जिसमें विभिन्न चरणों में दालों के उत्पादन और विपणन को मजबूत किया जाएगा।
7-फसल कटाई के बाद भंडारण सुविधाओं का निर्माण और सुधार करना, ताकि फसल का नुकसान कम हो।
इस मिशन मे दाल किसानों को क्या फायदा होगा !
- किसान: छोटे और सीमांत किसानों को बेहतर बीज, सब्सिडी, और बाजार का समर्थन मिलेगा जिससे उनको और भी अधिक लाभ होगा |
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था: दालों की खेती से रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
- उपभोक्ता: दालों की कीमतें स्थिर होंगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
- राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था: विदेशी मुद्रा की बचत होगी और खाद्य सुरक्षा बढ़ेगी।
- कृषि ऋण की सुविधा: किसानों को कर्ज की सुविधा प्रदान किया जाएगा , जिससे वे आवश्यक संसाधनों की खरीद कर सकें।
- किसानों के लिए अवसर: इस मिशन के तहत पंजीकृत किसानों को 4 साल तक अपनी फसल की गारंटीड खरीद और MSP का लाभ मिलेगा। यह उनकी आय को स्थिर करेगा।
आवेदन प्रक्रिया (Atmanirbhar Pulse Mission 2025)
हालांकि अभी तक आवेदन प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन संभावित प्रक्रिया इस प्रकार हो सकती है:
- आधिकारिक वेबसाइट (जैसे NAFED, NCCF, या कृषि मंत्रालय) पर जाएं।
- “आत्मनिर्भर पल्स मिशन” सेक्शन में रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें।
- आवश्यक दस्तावेज (आधार, बैंक विवरण, जमीन का रिकॉर्ड) अपलोड करें।
- नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या सहकारी समितियों के माध्यम से पंजीकरण।
- पंजीकरण के बाद, बीज, सब्सिडी, और खरीद के लिए अनुबंध की सुविधा मिलेगी।
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय कृषि कार्यालय या NAFED/NCCF की वेबसाइट पर नियमित अपडेट चेक करें।
नोट: नवीनतम अपडेट के लिए NAFED, NCCF, या कृषि मंत्रालय की वेबसाइट देखें। अपने स्थानीय कृषि कार्यालय से संपर्क करें और इस मिशन का हिस्सा बनें।
स्रोत: केंद्रीय बजट 2025-26, NAFED, और NCCF

