दुनिया में तकनीक ने जितनी तेज़ी से तरक्की की है, उतनी ही तेज़ी से इंटरनेट आम ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इस डिजिटल युग में भी कुछ देश ऐसे हैं जहाँ इंटरनेट आज भी एक ‘लक्ज़री’ की तरह है। एरिट्रिया (Eritrea) उन्हीं गिने-चुने देशों में से एक है। यह देश इंटरनेट सेंसरशिप और सूचना की रोक-थाम के लिए दुनियाभर में कुख्यात है और यह इंटरनेट ना मात्र है सिर्फ गिनें चुने साइबर कैफे मे मिलता है वो भी 2G स्पीड के साथ जहा आपको अगर टेक्स्ट मेसेजेस Whatsapp से भेजना हो तो 5-10 मिनट का टाइम लग जाता है तो आप अब फोटो और विडिओ कैसे और कितने देर मे जाएगा ये तो समझ ही गए होंगे ।
Eritrea(एरिट्रिया) देश के बारे मे जानिए
एरिट्रिया, पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक छोटा सा देश है जिसकी सीमा सूडान, इथियोपिया और जिबूती से मिलती है। यह देश 1993 में इथियोपिया से स्वतंत्र हुआ था। हालांकि स्वतंत्रता के तीन दशकों बाद भी यहाँ लोकतंत्र की स्थापना नहीं हो सकी। राष्ट्रपति इसैयास अफेवर्की (Isaias Afwerki) 1993 से लगातार सत्ता में हैं और देश में कोई चुनाव अब तक नहीं हुआ है। यही राजनीतिक व्यवस्था इंटरनेट और मीडिया पर भी कड़ी पकड़ बनाए हुए है।
Eritrea(एरिट्रिया) देश इंटरनेट की स्थिति बेहद दयनीय है
2025 तक एरिट्रिया में इंटरनेट उपयोग करने वाले लोगों की संख्या कुल आबादी का केवल 20% है। वह भी मुख्यतः शहरी क्षेत्रों में स्थित कुछ इंटरनेट कैफे तक सीमित है। मोबाइल इंटरनेट, ब्रॉडबैंड कनेक्शन और WiFi जैसी सुविधाएँ आम लोगों के लिए लगभग अप्राप्य हैं।तो कह सकते है की इस देश मे इंटरनेट की स्थिति वाकई मे बहुत अधिक दयनीय है ।

क्या इस देश मे मोबाइल इंटरनेट उपलब्ध है?
नहीं। एरिट्रिया में मोबाइल इंटरनेट सेवा सरकारी रूप से उपलब्ध नहीं है। केवल सरकारी अधिकारियों और विशेष अनुमति प्राप्त लोगों को ही सीमित डेटा एक्सेस की सुविधा दी जाती है। एक सामान्य नागरिक के लिए मोबाइल डेटा इस्तेमाल करना आज भी सपना ही है।
Eritrea(एरिट्रिया) देश मे इंटरनेट की कमी के पीछे के प्रमुख कारण
1. सरकारी सेंसरशिप और निगरानी
एरिट्रिया में सरकार मीडिया, पत्रकारिता और ऑनलाइन गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखती है। किसी भी तरह की राजनीतिक असहमति या स्वतंत्र विचारों को सरकार राष्ट्रविरोधी मानती है। यही कारण है कि इंटरनेट कैफे में भी निगरानी की जाती है और उपयोगकर्ताओं की जानकारी दर्ज की जाती है।
2. तकनीकी अवसंरचना का अभाव
देश में इंटरनेट की बुनियादी संरचना बहुत ही कमजोर है। एकमात्र टेलीकॉम कंपनी EriTel है, जो पूरी तरह से सरकारी स्वामित्व में है। यह कंपनी भी केवल सीमित लैंडलाइन और 2G मोबाइल सेवाएँ ही प्रदान करती है। हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क जैसे 3G, 4G या 5G का नामोनिशान तक नहीं है।
3. राजनीतिक कारण

सरकार को डर है कि इंटरनेट के माध्यम से लोग बाहरी दुनिया के विचारों, खबरों और विरोध की आवाज़ों से प्रभावित हो सकते हैं। अरब स्प्रिंग जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए एरिट्रिया सरकार ने इंटरनेट को जनता से दूर ही रखने का निर्णय लिया।
4. आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ
देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर है। अधिकांश लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं और इंटरनेट जैसी सेवा को वहन कर पाना उनके लिए असंभव है। इसके अलावा, देश में तकनीकी साक्षरता की भी भारी कमी है।
Eritrea(एरिट्रिया):पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बंदिशें
एरिट्रिया को “अफ्रीका का उत्तर कोरिया” कहा जाता है। 2001 से लेकर अब तक देश में कोई स्वतंत्र मीडिया हाउस संचालित नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों को देश में घुसने की अनुमति नहीं दी जाती और स्थानीय पत्रकारों को बिना मुकदमे के जेल में डाल दिया जाता है।
“Reporters Without Borders” द्वारा प्रकाशित प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (Press Freedom Index) में एरिट्रिया हमेशा सबसे निचले पायदानों पर रहा है।
इस देश को कब मिलेगा डिजिटल आज़ादी?

एरिट्रिया के नागरिक आज भी उस दुनिया से कटे हुए हैं जहाँ लोग इंटरनेट के ज़रिए शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और लोकतांत्रिक अधिकारों की जानकारी पा रहे हैं। सरकार की नीतियाँ, कमजोर संरचना, और राजनीतिक डर इस देश को डिजिटल दुनिया से अलग-थलग किए हुए हैं। जब तक राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव नहीं आता और नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं मिलती, तब तक एरिट्रिया में इंटरनेट केवल सत्ता के करीबी लोगों तक ही सीमित रहेगा।
